श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.173.32 
पश्यामि च तथा कर्णं विचरन्तमभीतवत्।
द्रवमाणान् रथोदारान् किरन्तं निशितै: शरै:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मैं देख रहा हूँ कि कर्ण निर्भय होकर इधर-उधर घूम रहा है और भागते हुए सारथिओं पर भी पीछे से तीखे बाणों की वर्षा कर रहा है।
 
I see that Karna is moving about fearlessly and is showering sharp arrows from behind even on the fleeing charioteers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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