श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.173.31 
द्रोणसायकनुन्नानां भग्नानां मधुसूदन।
कर्णेन त्रास्यमानानामवस्थानं न विद्यते॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! द्रोणाचार्य के बाणों से घायल होकर और कर्ण से भयभीत होकर हमारे सैनिक भाग रहे हैं और कहीं भी रुकने में असमर्थ हैं॥31॥
 
Madhusudana! Our soldiers, wounded by Dronacharya's arrows and frightened by Karna, are running away and are unable to stop anywhere.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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