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mahabharat 7.173.30: ऐसी स्थिति में कर्ण की सेना के प्रति हमारा क्या सामयिक कर्तव्य होना चाहिए, इसका आप शीघ्र निर्णय करें; क्योंकि हमारी सेना बार-बार भाग रही है॥30॥   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.173.30 
एवंगते प्राप्तकालं कर्णानीके पुन: पुन:।
भवान् व्यवस्यतु क्षिप्रं द्रवते हि वरूथिनी॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
ऐसी स्थिति में कर्ण की सेना के प्रति हमारा क्या सामयिक कर्तव्य होना चाहिए, इसका आप शीघ्र निर्णय करें; क्योंकि हमारी सेना बार-बार भाग रही है॥30॥
 
In such a situation, please decide quickly what our timely duty should be towards Karna's army; because our army is fleeing again and again.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)