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श्लोक 7.173.29  |
एवमुक्तो महाराज पार्थ: कृष्णमथाब्रवीत्।
भीत: कुन्तीसुतो राजा राधेयस्याद्य विक्रमात्॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज! युधिष्ठिर के ऐसा कहने पर अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा- 'हे प्रभु! आज कुन्तीनन्दन राजा युधिष्ठिर राधापुत्र कर्ण के पराक्रम से भयभीत हो गये हैं। 29॥ |
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| Maharaj! On Yudhishthir saying this, Arjun said to Lord Krishna - 'Lord! Today Kuntinandan King Yudhishthir is frightened by the bravery of Radha's son Karna. 29॥ |
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