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श्लोक 7.173.28  |
यदत्रानन्तरं कार्यं प्राप्तकालं च पश्यसि।
कर्णस्य वधसंयुक्तं तत् कुरुष्व धनंजय॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| धनंजय! अब कर्णवध के सम्बन्ध में जो कुछ करने का उचित समय समझो, वही करो॥ 28॥ |
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| Dhananjaya! Now do whatever you think is the right time to do in connection with the killing of Karna.'॥ 28॥ |
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