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mahabharat 7.173.28: धनंजय! अब कर्णवध के सम्बन्ध में जो कुछ करने का उचित समय समझो, वही करो॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.173.28 
यदत्रानन्तरं कार्यं प्राप्तकालं च पश्यसि।
कर्णस्य वधसंयुक्तं तत् कुरुष्व धनंजय॥ २८॥
 
 
अनुवाद
धनंजय! अब कर्णवध के सम्बन्ध में जो कुछ करने का उचित समय समझो, वही करो॥ 28॥
 
Dhananjaya! Now do whatever you think is the right time to do in connection with the killing of Karna.'॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)