श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.173.27 
यथा विसृजतश्चास्य संदधानस्य चाशुगान्।
पश्यामि नान्तरं पार्थ क्षपयिष्यति नो ध्रुवम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कर्ण जब धनुष पर बाण चढ़ाता है और जब छोड़ता है, इसमें मुझे तनिक भी अन्तर नहीं दिखाई देता। ऐसा प्रतीत होता है कि वह हमारी सम्पूर्ण सेना का विनाश अवश्य कर देगा॥ 27॥
 
I do not see the slightest difference in when Karna places the arrows on the bow and when he releases them. It seems that he will certainly destroy our entire army.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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