श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.173.21 
तान्यनीकानि भग्नानि द्रवमाणानि भारत।
अभ्यद्रवद् द्रुतं कर्ण: पृष्ठतो विकिरन् शरान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! कर्ण ने उन भयभीत होकर भागते हुए सैनिकों पर बड़े वेग से बाणों की वर्षा करते हुए आक्रमण किया।
 
Bhaarat! Karna charged after those soldiers who were running away in fear, showering arrows on them with great speed. 21.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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