Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.173.20: वे युद्धभूमि में अचेत होकर दौड़ रहे अपने ही योद्धा को कर्ण समझकर उससे डरकर भाग जाते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.173.20 
अपि स्वं समरे योधं धावमानं विचेतसम्।
कर्णमेवाभ्यमन्यन्त ततो भीता द्रवन्ति ते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वे युद्धभूमि में अचेत होकर दौड़ रहे अपने ही योद्धा को कर्ण समझकर उससे डरकर भाग जाते थे।
 
They would mistake even their own warrior running unconscious on the battlefield for Karna and would run away in fear from him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)