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mahabharat 7.173.2: तब हर्ष और उत्साह में भरे हुए धृष्टद्युम्न ने तत्काल ही दस बाणों से कर्ण को घायल करके बदला लिया और कहा - 'खड़े रहो, खड़े रहो।'॥2॥   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.173.2 
प्रतिविव्याध तं तूर्णं धृष्टद्युम्नोऽपि मारिष।
दशभि: सायकैर्हृष्टस्तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब हर्ष और उत्साह में भरे हुए धृष्टद्युम्न ने तत्काल ही दस बाणों से कर्ण को घायल करके बदला लिया और कहा - 'खड़े रहो, खड़े रहो।'॥2॥
 
Honorable King! Then Dhrishtadyumna, filled with joy and enthusiasm, took revenge by instantly wounding Karna with ten arrows and said, 'Stand, stand.'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)