श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.173.17 
ऊरू चिच्छेद चान्यस्य गजस्थस्य विशाम्पते।
वाजिपृष्ठगतस्यापि भूमिष्ठस्य च मारिष॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रज्ञाननाथ! कर्ण ने हाथी, घोड़े और पृथ्वी पर चलने वाले अन्य योद्धाओं की जाँघें काट डालीं।॥17॥
 
Respected Prajnanatha! Karna cut off the thighs of the other warriors who were riding on elephants, horses and walking on the ground. ॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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