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mahabharat 7.172.8: जब आपके पुत्र ने उन दोनों वीरों को अपने वचनों के चाबुक से इस प्रकार पीड़ित किया, तब वे कुचले हुए सर्पों के समान क्रोधित हो उठे और पुनः भयंकर युद्ध करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.172.8 
वाक्प्रतोदेन तौ वीरौ प्रणुन्नौ तनयेन ते।
प्रावर्तयेतां संग्रामं घट्टिताविव पन्नगौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब आपके पुत्र ने उन दोनों वीरों को अपने वचनों के चाबुक से इस प्रकार पीड़ित किया, तब वे कुचले हुए सर्पों के समान क्रोधित हो उठे और पुनः भयंकर युद्ध करने लगे।
 
When your son thus afflicted those two heroes with the whip of his words, they became enraged like crushed serpents and once again began a fierce battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)