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mahabharat 7.172.6: उस समय आपकी सलाह सुनकर मैं कुन्तीपुत्रों के साथ यह शत्रुता न करता, जो समस्त योद्धाओं के लिए विनाशकारी सिद्ध हो रही है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.172.6 
तदैवाहं वच: श्रुत्वा भवद्भॺामनुसम्मतम्।
नाकरिष्यमिदं पार्थैर्वैरं योधविनाशनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस समय आपकी सलाह सुनकर मैं कुन्तीपुत्रों के साथ यह शत्रुता न करता, जो समस्त योद्धाओं के लिए विनाशकारी सिद्ध हो रही है॥6॥
 
At that time, having heard your advice, I would not have started this enmity with the sons of Kunti, which is proving disastrous for all warriors.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)