Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.172.5: दूसरों को सम्मान देने वाले वीरों! यदि तुम मुझे त्याग देना उचित समझते थे, तो तुम्हें उस समय मुझसे यह नहीं कहना चाहिए था कि 'हम युद्ध में पाण्डवों को परास्त कर देंगे।'॥5॥   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.172.5 
यद्यहं भवतोस्त्याज्यो न वाच्योऽस्मि तदैव हि।
आवां पाण्डुसुतान् संख्ये जेष्याव इति मानदौ॥ ५॥
 
 
अनुवाद
दूसरों को सम्मान देने वाले वीरों! यदि तुम मुझे त्याग देना उचित समझते थे, तो तुम्हें उस समय मुझसे यह नहीं कहना चाहिए था कि 'हम युद्ध में पाण्डवों को परास्त कर देंगे।'॥5॥
 
Heroes who give respect to others! If you thought it was right to abandon me then you should not have said to me at that time that 'We will defeat the Pandavas in the war.'॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)