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श्लोक 7.172.41  |
तथा संयुध्यमानानां विगाढासीन्महानिशा।
पाण्डवानां च राजेन्द्र कौरवाणां च सर्वश:॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! इस प्रकार युद्ध में लगे हुए पाण्डवों और कौरवों की वह महान रात्रि अत्यन्त भयंकर हो गई ॥ 41॥ |
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| King! Thus the great night of the Pandavas and the Kauravas engaged in the war became extremely intense. ॥ 41॥ |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे संकुलयुद्धे द्विसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके अवसरपर संकुलयुद्धविषयक एक सौ बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७२॥
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