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mahabharat 7.172.40: हे कुरुश्रेष्ठ! जहाँ कहीं भी मशालें दिखाई देतीं, वहाँ वीर सैनिक पतंगों की तरह दौड़ पड़ते।   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.172.40 
यत्र यत्र स्म दृश्यन्ते प्रदीपा: कुरुसत्तम।
तत्र तत्र स्म शूरास्ते निपतन्ति पतङ्गवत्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! जहाँ कहीं भी मशालें दिखाई देतीं, वहाँ वीर सैनिक पतंगों की तरह दौड़ पड़ते।
 
O best of the Kurus! Wherever torches were visible, valiant soldiers rushed there like kites. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)