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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.172.4 
निहन्यमानां पाण्डूनां बलेन मम वाहिनीम्।
भूत्वा तद्विजये शक्तावशक्ताविव पश्यत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
किन्तु इस समय मेरी विशाल सेना पाण्डव सेना द्वारा नष्ट की जा रही है और आप सभी लोग उसे पराजित करने में समर्थ होते हुए भी ऐसे देख रहे हैं, मानो आप ऐसा करने में असमर्थ हैं।
 
‘But at this moment my huge army is being destroyed by the Pandava army and you all, despite being capable of defeating it, are looking on as if you are incapable of doing so.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)