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mahabharat 7.172.37: धूल और अंधकार से आच्छादित उस अत्यन्त भयंकर युद्ध में विजय की इच्छा रखने वाले योद्धा केवल अपना नाम और कुल जानकर ही युद्ध करते थे। 37.   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.172.37 
रजसा तमसा चैव संवृते भृशदारुणे।
केवलं नामगोत्रेण प्रायुध्यन्त जयैषिण:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
धूल और अंधकार से आच्छादित उस अत्यन्त भयंकर युद्ध में विजय की इच्छा रखने वाले योद्धा केवल अपना नाम और कुल जानकर ही युद्ध करते थे। 37.
 
In that extremely dreadful battle covered in dust and darkness, the warriors desirous of victory fought only by knowing their names and clans. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)