vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना
»
श्लोक 37
श्लोक
7.172.37
रजसा तमसा चैव संवृते भृशदारुणे।
केवलं नामगोत्रेण प्रायुध्यन्त जयैषिण:॥ ३७॥
अनुवाद
धूल और अंधकार से आच्छादित उस अत्यन्त भयंकर युद्ध में विजय की इच्छा रखने वाले योद्धा केवल अपना नाम और कुल जानकर ही युद्ध करते थे। 37.
In that extremely dreadful battle covered in dust and darkness, the warriors desirous of victory fought only by knowing their names and clans. 37.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas