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mahabharat 7.172.35: हे राजन! उस रात दोनों सेनाओं का महायुद्ध अत्यन्त भयंकर प्रतीत हो रहा था, मानो चन्द्रोदय के समय दो समुद्र उमड़ रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.172.35 
स सम्प्रहारस्तुमुलो निशि प्रत्यभवन्महान्।
यथा सागरयो राजंश्चन्द्रोदयविवृद्धयो:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उस रात दोनों सेनाओं का महायुद्ध अत्यन्त भयंकर प्रतीत हो रहा था, मानो चन्द्रोदय के समय दो समुद्र उमड़ रहे हों।
 
O King! That night the great battle between the two armies appeared extremely dreadful, like two oceans surging at the time of moonrise.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)