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mahabharat 7.172.33: तत्पश्चात् दोनों नरसिंह श्रीकृष्ण और अर्जुन युद्ध के प्रारम्भ में द्रोणाचार्य और कर्ण के सामने खड़े हो गए ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.172.33 
ततस्तौ पुरुषव्याघ्रावुभौ माधवपाण्डवौ।
द्रोणकर्णौ समासाद्य धिष्ठितौ रणमूर्धनि॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दोनों नरसिंह श्रीकृष्ण और अर्जुन युद्ध के प्रारम्भ में द्रोणाचार्य और कर्ण के सामने खड़े हो गए ॥33॥
 
Thereafter, both the male lions, Shri Krishna and Arjun, stood in front of Dronacharya and Karna at the beginning of the war. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)