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mahabharat 7.172.31: सोमक और पाण्डव योद्धाओं से घिरे हुए युद्ध में व्याकुल भीमसेन, महारथी द्रोण और कर्ण का सामना करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.172.31 
एष भीमो रणश्लाघी वृत: सोमकपाण्डवै:।
अभ्यवर्तत वेगेन द्रोणकर्णौ महारथौ॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
सोमक और पाण्डव योद्धाओं से घिरे हुए युद्ध में व्याकुल भीमसेन, महारथी द्रोण और कर्ण का सामना करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
 
This battle-stricken Bhimasena, surrounded by Somaka and the Pandava warriors, is rapidly approaching to confront the mighty car-warriors Drona and Karna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)