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mahabharat 7.172.30: राजन! भीमसेन को वहाँ आया देखकर भगवान श्रीकृष्ण पाण्डुपुत्र अर्जुन का हर्ष बढ़ाते हुए पुनः इस प्रकार बोले- 30॥   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.172.30 
वृकोदरमथायान्तं दृष्ट्वा तत्र जनार्दन:।
पुनरेवाब्रवीद् राजन् हर्षयन्निव पाण्डवम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
राजन! भीमसेन को वहाँ आया देखकर भगवान श्रीकृष्ण पाण्डुपुत्र अर्जुन का हर्ष बढ़ाते हुए पुनः इस प्रकार बोले- 30॥
 
Rajan! Seeing Bhimsen coming there, Lord Krishna, increasing the joy of Pandu's son Arjuna, again spoke like this - 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)