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mahabharat 7.172.3: युद्धभूमि में सव्यसाची अर्जुन द्वारा सिंधुराज जयद्रथ को मारा गया देखकर क्रोध से भरकर आप दोनों वीरों ने रात्रि में भी यहीं युद्ध जारी रखा।   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.172.3 
भवद्भॺामिह संग्राम: क्रुद्धाभ्यां सम्प्रवर्तित:।
आहवे निहतं दृष्ट्वा सैन्धवं सव्यसाचिना॥ ३॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में सव्यसाची अर्जुन द्वारा सिंधुराज जयद्रथ को मारा गया देखकर क्रोध से भरकर आप दोनों वीरों ने रात्रि में भी यहीं युद्ध जारी रखा।
 
Filled with anger upon seeing Jayadratha, the king of Sindhus, killed by Savyasachi Arjuna on the battlefield, you two heroes continued this battle here during the night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)