श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.172.27 
तावावां सर्वसैन्यैश्च व्यूहै: सम्यगुदायुधै:।
द्रोणं च सूतपुत्रं च प्रयताव: प्रबाधितुम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हम दोनों ने अपनी सेनाओं की व्यूह रचना की है, तथा अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर द्रोणाचार्य और सारथिपुत्र कर्ण को रोकने का प्रयत्न कर रहे हैं॥ 27॥
 
We both have formed an array of our armies, well equipped with weapons, and are trying to obstruct Dronacharya and charioteer Karna, the son of a charioteer.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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