श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.172.25 
एतयो: शरवर्षेण प्रभग्ना नो महारथा:।
वार्यमाणापि कौन्तेय पृतना नावतिष्ठते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! इन दोनों के बाणों की वर्षा से हमारे योद्धा काँप उठे हैं। रोकने पर भी हमारी सेना नहीं रुक रही है।॥25॥
 
Parth! Our warriors have been shaken by the shower of arrows from these two. Our army is not stopping even after being stopped.'॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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