श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.172.21 
तमसा संवृते लोके न प्राज्ञायत किंचन।
कौरवाणां प्रकाशेन दृश्यन्ते विद्रुता: परे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस समय पांडव सेना अंधकार में डूबी हुई थी। किसी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। कौरव सेना से आ रहे प्रकाश के कारण भागते हुए कुछ सैनिक दिखाई दे रहे थे। 21.
 
At that time the Pandava army was engulfed in darkness. No one could see anything. The light that was coming from the Kaurava army made some soldiers running away visible. 21.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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