| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना » श्लोक 19-20 |
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| | | | श्लोक 7.172.19-20  | सा तथा पाण्डवी सेना पीडॺमाना महात्मना।
निशि सम्प्राद्रवद् राजन्नुत्सृज्योल्का: सहस्रश:॥ १९॥
पश्यतो भीमसेनस्य विजयस्याच्युतस्य च।
यमयोर्धर्मपुत्रस्य पार्षतस्य च पश्यत:॥ २०॥ | | | | | | अनुवाद | | महाबली द्रोणाचार्य द्वारा इस प्रकार सतायी गयी पाण्डव सेना उस रात भीमसेन, अर्जुन, श्रीकृष्ण, नकुल, सहदेव, धर्मपुत्र युधिष्ठिर और धृष्टद्युम्न आदि के आगे हजारों मशालें फेंकती हुई भाग रही थी। | | | | The Pandava army, tormented in this manner by the great Dronacharya, was running away that night, throwing thousands of torches in front of Bhimasena, Arjuna, Shri Krishna, Nakula, Sahadeva, Dharmaputra Yudhishthira and Dhrishtadyumna, all in front of them. | | ✨ ai-generated | | |
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