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mahabharat 7.172.13-14h: जब सोमकों ने द्रोणाचार्य को युद्धभूमि में पाण्डव सेना का संहार करते देखा, तब उन्होंने चारों ओर से उन पर बाणों की वर्षा करके उन्हें तुरन्त घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 172: दुर्योधनके उपालम्भसे द्रोणाचार्य और कर्णका घोर युद्ध, पाण्डव-सेनाका पलायन, भीमसेनका सेनाको लौटाकर लाना और अर्जुनसहित भीमसेनका कौरवोंपर आक्रमण करना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.172.13-14h 
दृष्ट्वा च समरे द्रोणं निघ्नन्तं पाण्डवीं चमूम्॥ १३॥
विव्यधु: सोमकास्तूर्णं समन्ताच्छरवृष्टिभि:।
 
 
अनुवाद
जब सोमकों ने द्रोणाचार्य को युद्धभूमि में पाण्डव सेना का संहार करते देखा, तब उन्होंने चारों ओर से उन पर बाणों की वर्षा करके उन्हें तुरन्त घायल कर दिया।
 
When the Somakas saw Dronacharya killing the Pandava army in the battle-field, they showered arrows on him from all sides and instantly wounded him. 13 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)