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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 171: सात्यकिसे दुर्योधनकी, अर्जुनसे शकुनि और उलूककी तथा धृष्टद्युम्नसे कौरव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.171.8 
पतितैश्चामरैश्चैव श्वेतच्छत्रैश्च भारत।
बभूव धरणी पूर्णा नक्षत्रैर्द्यौरिव प्रभो॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनादन! गिरे हुए पंखों और श्वेत छतरियों से भरी हुई भूमि तारों से भरे आकाश के समान प्रतीत हो रही थी।
 
O Lord Bharatanadan! The ground filled with fallen fans and white umbrellas looked like the sky filled with stars. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)