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mahabharat 7.171.48-49h: महारथी धृष्टद्युम्न ने तुरन्त ही अपने बाणों से द्रोणाचार्य को रोक दिया और कौरव सेना का उसी प्रकार संहार करने लगे, जैसे इन्द्र राक्षस सेना का संहार करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.171: सात्यकिसे दुर्योधनकी, अर्जुनसे शकुनि और उलूककी तथा धृष्टद्युम्नसे कौरव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 171: सात्यकिसे दुर्योधनकी, अर्जुनसे शकुनि और उलूककी तथा धृष्टद्युम्नसे कौरव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  7.171.48-49h 
तं निवार्य शरैस्तूर्णं धृष्टद्युम्नो महारथ:॥ ४८॥
व्यधमत् कौरवीं सेनामासुरीं मघवानिव।
 
 
अनुवाद
महारथी धृष्टद्युम्न ने तुरन्त ही अपने बाणों से द्रोणाचार्य को रोक दिया और कौरव सेना का उसी प्रकार संहार करने लगे, जैसे इन्द्र राक्षस सेना का संहार करते हैं।
 
The great warrior Dhrishtadyumna immediately stopped Dronacharya with his arrows and began destroying the Kaurava army just as Indra destroys the demon army. 48 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)