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mahabharat 7.171.46-47h: तब समस्त क्षत्रियों का संहार करने वाले वीर द्रोणाचार्य ने उस धनुष को भूमि पर रख दिया और दूसरा अत्यन्त शक्तिशाली तथा शीघ्रगामी धनुष हाथ में ले लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.171: सात्यकिसे दुर्योधनकी, अर्जुनसे शकुनि और उलूककी तथा धृष्टद्युम्नसे कौरव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 171: सात्यकिसे दुर्योधनकी, अर्जुनसे शकुनि और उलूककी तथा धृष्टद्युम्नसे कौरव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.171.46-47h 
तन्निधाय धनुर्भूमौ द्रोण: क्षत्रियमर्दन:॥ ४६॥
आददेऽन्यद् धनु: शूरो वेगवत् सारवत्तरम्।
 
 
अनुवाद
तब समस्त क्षत्रियों का संहार करने वाले वीर द्रोणाचार्य ने उस धनुष को भूमि पर रख दिया और दूसरा अत्यन्त शक्तिशाली तथा शीघ्रगामी धनुष हाथ में ले लिया।
 
Then the brave Dronacharya, who killed all Kshatriyas, placed that bow on the ground and took up another very powerful and swift bow in his hand. 46 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)