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mahabharat 7.171.35-36h: ऐसा वीरतापूर्ण कार्य करके अर्जुन ने पुनः पाँच मुड़े हुए बाणों से शकुनि को घायल कर दिया। उसने तीन बाणों से उलूक को भी घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.171: सात्यकिसे दुर्योधनकी, अर्जुनसे शकुनि और उलूककी तथा धृष्टद्युम्नसे कौरव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 171: सात्यकिसे दुर्योधनकी, अर्जुनसे शकुनि और उलूककी तथा धृष्टद्युम्नसे कौरव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.171.35-36h 
कृत्वा तत् कर्म बीभत्सुरुग्रमुग्रपराक्रम:।
विव्याध शकुनिं भूय: पञ्चभिर्नतपर्वभि:॥ ३५॥
अताडयदुलूकं च त्रिभिरेव तथा शरै:।
 
 
अनुवाद
ऐसा वीरतापूर्ण कार्य करके अर्जुन ने पुनः पाँच मुड़े हुए बाणों से शकुनि को घायल कर दिया। उसने तीन बाणों से उलूक को भी घायल कर दिया।
 
Having performed that heroic deed, Arjuna again wounded Shakuni with five arrows having bent ends. He also injured Ulooka with three arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)