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mahabharat 7.170.8: हे भरतश्रेष्ठ! द्रोणाचार्य के द्वारा घायल हुए धृष्टद्युम्न ने क्रोध से अपने होठ काट लिये और तुरन्त ही टूटा हुआ धनुष फेंक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.170.8 
धृष्टद्युम्नस्तु निर्विद्धो द्रोणेन भरतर्षभ।
उत्ससर्ज धनुस्तूर्णं संदश्य दशनच्छदम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! द्रोणाचार्य के द्वारा घायल हुए धृष्टद्युम्न ने क्रोध से अपने होठ काट लिये और तुरन्त ही टूटा हुआ धनुष फेंक दिया।
 
O best of the Bharatas! Dhrishtadyumna, wounded by Dronacharya, bit his lips in anger and immediately threw away the broken bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)