श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 68-69
 
 
श्लोक  7.170.68-69 
प्रयाते सौबले राजन् पाण्डवानामनीकिनीम्।
बलेन महता युक्त: सूतपुत्रस्तु सात्वतम्॥ ६८॥
अभ्ययात् त्वरितो युद्धे किरन् शरशतान् बहून्।
तथैव पार्थिवा: सर्वे सात्यकिं पर्यवारयन्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
राजन! जब शकुनि पाण्डव सेना की ओर गया, तब सूतपुत्र कर्ण ने विशाल सेना लेकर युद्धस्थल में सैकड़ों बाणों की वर्षा करते हुए सात्यकि पर आक्रमण कर दिया। इसी प्रकार अन्य सभी राजाओं ने भी सात्यकि को घेर लिया। 68-69।
 
King! When Shakuni went towards the Pandava army, then Sutaputra Karna with a huge army immediately attacked Satyaki on the battlefield, showering hundreds of arrows. Similarly all the other kings also surrounded Satyaki. 68-69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)