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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.170.6 
ततो द्रोणं महाराज पाञ्चाल्य: पञ्चभि: शरै:।
विव्याध हृदये तूर्णं सिंहनादं ननाद च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय धृष्टद्युम्न ने एक साथ पाँच बाण द्रोणाचार्य की छाती में मारे और सिंह के समान दहाड़ा।
 
Maharaj! At that time Dhrishtadyumna shot five arrows at once into the chest of Dronacharya and roared like a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)