Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.170.58-59: अतः बहुत से श्रेष्ठ योद्धाओं को उनका सामना करने के लिए वहाँ जाना चाहिए। जब तक अर्जुन को यह पता न चले कि सात्यकि बहुत से योद्धाओं से घिरा हुआ है, तब तक तुम सभी वीर योद्धाओं को यथासम्भव शीघ्रतापूर्वक बाण चलाने चाहिए। 58-59। | mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्र गच्छन्तु बहव: प्रवरा रथसत्तमा:॥ ५८॥
यावत् पार्थो न जानाति सात्यकिं बहुभिर्वृतम्।
ते त्वरध्वं तथा शूरा: शराणां मोक्षणे भृशम्॥ ५९॥
अनुवाद
अतः बहुत से श्रेष्ठ योद्धाओं को उनका सामना करने के लिए वहाँ जाना चाहिए। जब तक अर्जुन को यह पता न चले कि सात्यकि बहुत से योद्धाओं से घिरा हुआ है, तब तक तुम सभी वीर योद्धाओं को यथासम्भव शीघ्रतापूर्वक बाण चलाने चाहिए। 58-59।
‘Therefore many excellent warriors should go there to face them. Until Arjuna knows that Satyaki is surrounded by a large number of warriors, all of you brave warriors should be as quick as possible in shooting arrows. 58-59.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥