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mahabharat 7.170.52-53h: अर्जुन के रथ के चारों ओर हो रहे नाना प्रकार के कोलाहल, बार-बार होने वाली गर्जना तथा अन्य अनेक ध्वनियों को सुनो।   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.170.52-53h 
हाहाकाररवांश्चैव सिंहनादांश्च पुष्कलान्॥ ५२॥
शृणु शब्दान् बहुविधानर्जुनस्य रथं प्रति।
 
 
अनुवाद
अर्जुन के रथ के चारों ओर हो रहे नाना प्रकार के कोलाहल, बार-बार होने वाली गर्जना तथा अन्य अनेक ध्वनियों को सुनो।
 
Listen to the various types of commotion, the repeated roars and many other sounds that are occurring around Arjuna's chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)