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mahabharat 7.170.45: नरेश्वर! अर्जुन के रथ की ध्वनि और गाण्डीव धनुष की टंकार सुनकर सूतपुत्र कर्ण ने दुर्योधन से इस प्रकार कहा- 45॥   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.170.45 
श्रुत्वा तु रथनिर्घोषं गाण्डीवस्य च नि:स्वनम्।
सूतपुत्रोऽब्रवीद् राजन् दुर्योधनमिदं वच:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! अर्जुन के रथ की ध्वनि और गाण्डीव धनुष की टंकार सुनकर सूतपुत्र कर्ण ने दुर्योधन से इस प्रकार कहा- 45॥
 
Nareshwar! Hearing the sound of Arjuna's chariot and the tinkling sound of Gandiva's bow, Suta's son Karna said to Duryodhana thus - 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)