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mahabharat 7.170.44: महाराज! जब वह युद्ध चल रहा था, जिसमें अनेक वीर योद्धाओं का नाश हो गया था, तब गाण्डीव धनुष की टंकार बहुत जोर से सुनाई देने लगी।   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.170.44 
वर्तमाने तु संग्रामे तस्मिन् वीरवरक्षये।
अतीव शुश्रुवे राजन् गाण्डीवस्य महास्वन:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब वह युद्ध चल रहा था, जिसमें अनेक वीर योद्धाओं का नाश हो गया था, तब गाण्डीव धनुष की टंकार बहुत जोर से सुनाई देने लगी।
 
King! When that battle which destroyed so many brave warriors was going on, the deep twang of the Gandiva bow started to be heard very loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)