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mahabharat 7.170.43: फिर उन दोनोंने दूसरे शत्रुओंके भयंकर धनुषोंपर प्रत्यंचा चढ़ाकर तीखे बाणोंसे युधानको सब ओरसे बींधना आरम्भ कर दिया ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.170.43 
तावन्ये धनुषी सज्ये कृत्वा शत्रुभयंकरे।
युयुधानमविध्येतां समन्तान्निशितै: शरै:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
फिर उन दोनोंने दूसरे शत्रुओंके भयंकर धनुषोंपर प्रत्यंचा चढ़ाकर तीखे बाणोंसे युधानको सब ओरसे बींधना आरम्भ कर दिया ॥43॥
 
Then both of them put strings on the other enemy's fierce bows and started piercing Yuudhan with sharp arrows from all sides. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)