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mahabharat 7.170.39: हे प्रजानाथ! सात्यकि के बाण से शक्तिशाली वृषसेन घायल हो गया, उसका धनुष गिर गया और वह अपने रथ पर मूर्छित होकर गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.170.39 
तेन बाणेन निर्विद्धो वृषसेनो विशाम्पते।
न्यपतत् स रथे मूढो धनुरुत्सृज्य वीर्यवान्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! सात्यकि के बाण से शक्तिशाली वृषसेन घायल हो गया, उसका धनुष गिर गया और वह अपने रथ पर मूर्छित होकर गिर पड़ा।
 
O Prajanath! The powerful Vrishasena was wounded by Satyaki's arrow, dropped his bow, and fell unconscious on his chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)