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mahabharat 7.170.37: महाराज! आपके अन्य योद्धा तथा कवचधारी कर्णपुत्र वृषसेन, सभी तीखे बाणों द्वारा सात्यकि को चारों ओर से बींधने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.170.37 
तावकाश्च महाराज कर्णपुत्रश्च दंशित:।
सात्यकिं विव्यधुस्तूर्णं समन्तान्निशितै: शरै:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपके अन्य योद्धा तथा कवचधारी कर्णपुत्र वृषसेन, सभी तीखे बाणों द्वारा सात्यकि को चारों ओर से बींधने लगे।
 
Maharaj! Your other warriors and Karna's son Vrishasena, wearing armor, all of them began piercing Satyaki with sharp arrows from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)