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mahabharat 7.170.31: महाराज! तब सात्यकि ने भी समस्त योद्धाओं के देखते-देखते कर्ण को दस बाणों से घायल कर दिया और कहा - 'दृढ़ता से खड़े रहो, भागो मत।'   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.170.31 
तं सात्यकिर्महाराज विव्याध दशभि: शरै:।
पश्यतां सर्ववीराणां मा गास्तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तब सात्यकि ने भी समस्त योद्धाओं के देखते-देखते कर्ण को दस बाणों से घायल कर दिया और कहा - 'दृढ़ता से खड़े रहो, भागो मत।'
 
Maharaj! Then Satyaki also wounded Karna with ten arrows in front of all the warriors and said - 'Stand firm, don't run away.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)