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mahabharat 7.170.3: महाराज! द्रोणाचार्य को मारने की इच्छा से आ रहे धृष्टद्युम्न को पाण्डवों सहित पांचालों ने घेर लिया और अपने बीच में ले लिया॥3॥   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.170.3 
धृष्टद्युम्नमथायान्तं द्रोणस्यान्तचिकीर्षया।
परिवव्रुर्महाराज पञ्चाला: पाण्डवै: सह॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! द्रोणाचार्य को मारने की इच्छा से आ रहे धृष्टद्युम्न को पाण्डवों सहित पांचालों ने घेर लिया और अपने बीच में ले लिया॥3॥
 
Maharaj! Dhrishtadyumna, who was coming with the desire to kill Dronacharya, was surrounded by the Panchalas along with the Pandavas and was taken into their midst.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)