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mahabharat 7.170.26: क्रोध से उसकी आँखें लाल हो रही थीं। उसने दूसरा धनुष हाथ में लिया और गहरी साँस लेकर महाबली धृष्टद्युम्न की ओर दौड़ा और उन पर बाणों की वर्षा करने लगा॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.170.26 
सोऽन्यद् धनु: समादाय क्रोधरक्तेक्षण:श्वसन्।
अभ्यद्रवच्छरौघैस्तं धृष्टद्युम्नं महाबलम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
क्रोध से उसकी आँखें लाल हो रही थीं। उसने दूसरा धनुष हाथ में लिया और गहरी साँस लेकर महाबली धृष्टद्युम्न की ओर दौड़ा और उन पर बाणों की वर्षा करने लगा॥ 26॥
 
His eyes were turning red with anger. He took the second bow in his hand and taking a deep breath ran towards the mighty Dhrishtadyumna and started showering arrows on him.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)