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mahabharat 7.170.23: युद्धभूमि में उस सिर ने अपने होंठ काट लिए थे। वह आँधी से उड़कर गिरे पके इमली के फल की तरह ज़मीन पर गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.170.23 
तच्छिरो न्यपतद् भूमौ संदष्टौष्ठपुटं रणे।
महावातसमुद्‍धूतं पक्वं तालफलं यथा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में उस सिर ने अपने होंठ काट लिए थे। वह आँधी से उड़कर गिरे पके इमली के फल की तरह ज़मीन पर गिर पड़ा।
 
On the battlefield that head had bitten its lip. It fell to the ground like a ripe tamarind fruit blown down by a storm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)