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mahabharat 7.170.22: तदनन्तर उस महाबली योद्धा दूसरे भल्लद्वार ने द्रुम्सेन का सुवर्ण के चमकते हुए कुण्डलों से सुशोभित सिर काट डाला॥22॥   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.170.22 
भल्लेनान्येन तु पुन: सुवर्णोज्ज्वलकुण्डलम्।
निचकर्त शिर: कायाद् द्रुमसेनस्य वीर्यवान्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर उस महाबली योद्धा दूसरे भल्लद्वार ने द्रुम्सेन का सुवर्ण के चमकते हुए कुण्डलों से सुशोभित सिर काट डाला॥22॥
 
Then the second Bhalladwara, that mighty warrior, cut off the head decorated with the shining earrings made of gold of Drumasena. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)