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mahabharat 7.170.21: तब धृष्टद्युम्न ने युद्धस्थल में तीन तीखे और घातक बाणों से द्रुमसेन को घायल कर दिया, जिनके पंख सुनहरे थे और जिन्हें एक शिला पर रगड़कर साफ किया गया था।   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.170.21 
स तु तं प्रतिविव्याध त्रिभिस्तीक्ष्णैरजिह्मगै:।
स्वर्णपुङ्खै: शिलाधौतै: प्राणान्तकरणैर्युधि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब धृष्टद्युम्न ने युद्धस्थल में तीन तीखे और घातक बाणों से द्रुमसेन को घायल कर दिया, जिनके पंख सुनहरे थे और जिन्हें एक शिला पर रगड़कर साफ किया गया था।
 
Then Dhrishtadyumna wounded Drumasena on the battlefield with three sharp and fatal arrows having golden feathers, which were cleaned on a rock.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)