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mahabharat 7.170.2: अपने उत्तम धनुष पर बाण चढ़ाकर और उसकी डोरी को बार-बार खींचकर उसने द्रोणाचार्य के स्वर्ण-मंडित रथ पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.170.2 
संदधानो धनु:श्रेष्ठं ज्यां विकर्षन् पुन: पुन:।
अभ्यद्रवत द्रोणस्य रथं रुक्मविभूषितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
अपने उत्तम धनुष पर बाण चढ़ाकर और उसकी डोरी को बार-बार खींचकर उसने द्रोणाचार्य के स्वर्ण-मंडित रथ पर आक्रमण किया।
 
Having strung his excellent bow with arrows and repeatedly pulling its string, he attacked the gold-decorated chariot of Dronacharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)