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mahabharat 7.170.14: हे राजन! धनुर्धर सूतपुत्र के द्वारा अनेक टुकड़ों में काटा गया वह बाण विषरहित सर्प के समान तुरन्त पृथ्वी पर गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 7.170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.170.14 
स च्छिन्नो बहुधा राजन् सूतपुत्रेण धन्विना।
निपपात शरस्तूर्णं निर्विषो भुजगो यथा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! धनुर्धर सूतपुत्र के द्वारा अनेक टुकड़ों में काटा गया वह बाण विषरहित सर्प के समान तुरन्त पृथ्वी पर गिर पड़ा।
 
O King! That arrow, cut into many pieces by the archer Suta's son, fell instantly on the earth like a cobra without poison.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)