Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.17.9-10: ‘महाराज! यदि हम लोग दो क्षण भी अर्जुन के बिना युद्धभूमि में खड़े रहें, तो मैं आज ही आपके पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को उनके अनुयायियों सहित अवश्य ही पकड़ लूँगा; इसमें संशय नहीं है और यदि वे युद्ध छोड़कर भाग जाएँ, तो यह हमारी विजय से भी अधिक उत्तम होगा।’॥9-10॥ | mahabharat अध्याय 7.17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं तेऽहं महाराज धर्मपुत्रं युधिष्ठिरम्।
समानेष्यामि सगणं वशमद्य न संशय:॥ ९॥
यदि तिष्ठति संग्रामे मुहूर्तमपि पाण्डव:।
अथापयाति संग्रामाद् विजयात् तद् विशिष्यते॥ १०॥
अनुवाद
‘महाराज! यदि हम लोग दो क्षण भी अर्जुन के बिना युद्धभूमि में खड़े रहें, तो मैं आज ही आपके पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को उनके अनुयायियों सहित अवश्य ही पकड़ लूँगा; इसमें संशय नहीं है और यदि वे युद्ध छोड़कर भाग जाएँ, तो यह हमारी विजय से भी अधिक उत्तम होगा।’॥9-10॥
‘Maharaj! If we stand in the battlefield without Arjun for even two moments, then I will surely capture your son of Pandu, Yudhishthira, along with his followers today; there is no doubt about this and if they run away from the battle, then this will be even better than our victory.’॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥